श्रेणी: साहित्य जगत

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मैं बाँदा में रचता हूँ नेपाल : डॉ. बाल गोपाल श्रेष्ठ की तीन कवितायें

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मैं बाँदा में रचता हूँ नेपाल-II ————————– डॉ. बाल गोपाल श्रेष्ठ की तीन कवितायें (अनुवाद- पवन पटेल) कवि परिचय : कवि व मानवशास्त्री डॉ. बाल...
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पुस्तक समीक्षा: संजय कृष्ण- अखंड भारत के शिल्पकार सरदार पटेल

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— संजय कृष्ण ( समीक्षा लेखक) अखंड भारत के शिल्पकार हमारे देश के इतिहासकारों ने पटेल पर बहुत कम शब्द खर्च किए। पटेल के साथ...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : दामिनी यादव- एक तारीख़ में समेट कर टुकड़ा-भर आसमान का …

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आज के कवि ———-——— दामिनी यादव एक साहसिक कवयित्री और युवा पत्रकार है। वे स्त्री विषयों पर बेहद बोल्ड और सशक्त कविताएं लिखती हैं। चाहे...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : संदीप प्रसाद – झूठ ने उसे दिखा-दिखा कर बजाया, लालच का झुनझुना …

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आज के कवि ———–—— संदीप प्रसाद हमारे समय के त्रासदी और विसंगतियों को रेखांकित करने वाले कवि हैं। वह छोटा सा फूल जिससे मिलकर प्रफुल्लित...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : ख़ालिद खान – सभ्यता की पहली ईंट उन्होंने ही रखी थी …

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आज के कवि ‐————— इस कठिन दौर में खालिद उम्मीद के कवि हैं। खालिद संवेदनशीलता से अपनी बात रखते हैं। कहीं-कहीं आपको निराशा का भाव...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : चन्द्र मोहन- एक श्रमिक को क्यों देखना चाहते हो ऐसे…

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आज के कवि ————— चन्द्र मोहन की कविताओं में देसी मिट्टी की सौंधी महक और जीवन का संघर्ष है। चन्द्र मोहन असम के एक खेत...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : इलिका प्रिय – जीवन हथियार से नहीं चलता …

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आज के कवि __________ इलिका की कविताओं में जोश है आक्रोश है. यही उनके कवि को बचाए भी रखते हैं. इलिका की कविताएँ पढ़ते हुए...
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मैं बांदा में रचता हूँ नेपाल (हिन्दी जगत का नेपाली साहित्य से परिचय की एक श्रृंखला)

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मैं बाँदा में रचता हूँ नेपाल “मैं बाँदा में रचता हूँ नेपाल”नामक श्रृंखला को mymirror.in के पोर्टल पर लाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी जगत को...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : विक्रम – … ना लिख पाने से पहले मैं लिख रहा हूँ…

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आज के कवि ———– कवि विक्रम इन्कलाब लिखता है विक्रम बहुत आम भाषा में लिखता है. विक्रम क्या लिखता है? यह एक सवाल हो सकता...
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‘आज के कवि’ श्रृंखला : रेखा चमोली – संविधान! कितना शानदार शब्द हो तुम

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आज के कवि ————— रेखा चमोली की कविताओं में शिद्दत से महसूस कर सकते हैं स्त्री का दर्द, मजदूर की पीड़ा और पहाड़ का दुःख....