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मुस्लिम समाज ने किया दहेज बहिष्कार, 11 इकरारनामा पर किया साइन

लखनऊ, 3 अप्रैल 2021। नमाज के बाद  लखनऊ में मुस्लिम समाज ने दहेज का बहिष्कार करने सहित 11 बिंदुओं वाले इकरारनामा पर हस्ताक्षर किए हैं।

लखनऊ के मुसलमानों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इकरारनामे को अमल में लाने के लिए इसे जुमे की नमाज में इमामों ने पढ़कर सुनाया। शरीअत के मुताबिक सादगी से मस्जिद में निकाह करने, दहेज के बहिष्कार सहित शादियों में फिजूलखर्ची से परहेज करने के निर्देश को अमल में लाना है। साथ ही 11 बिंदुओं वाले इकरारनामे के मुताबिक निकाह करने की अपील की गई। नमाज के बाद मुसलमानों ने इकरारनामे पर हस्ताक्षर कर इस मुहिम को सफल बनाने का संकल्प भी लिया।

लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह स्थित जामा मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने अपने मशविरा में कहा कि निकाह सुन्नत तरीके से किया जाए। निकाह किसी रस्म का नाम नहीं, बल्कि इसे एक इबादत का दर्जा मिला है, लिहाजा किसी भी इबादत में नाजायज या हराम काम नहीं किया जा सकता। मौलाना ने कहा कि इस इकरारनामे के माध्यम से मुसलमानों को बोर्ड ने यह भी सलाह दी कि निकाह के कार्यक्रम या वलीमे में किसी भी प्रकार का नाच गाना या आतिशबाजी न की जाए। निकाह समारोह को सादगी के साथ कम खर्च में किया जाए और वक्त की पाबंदी का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

मौलाना फरंगी महली ने इस बात पर भी जोर दिया कि शरीअत के अनुसार बेटियों को वरासत में जो अधिकार मिला है उससे उन्हें महरूम करके गुनहगार न बनें। बल्कि बेटियों को शरई अधिकार जरूर दें। इस्लामी शरीअत के आदेश के मुताबिक दूल्हे को चाहिए कि वह दुल्हन का महर तुरंत अदा करे।

नमाज के बाद उपस्थित नमाज़ियों ने एक बोर्ड पर इस इकरारनामे को लगाया गया और उस इकरारनामे पर हस्ताक्षर कर समर्थन दिया।

उस इकरारनामे की खास बातें यह लिखी गई थी कि निकाह सुन्नत तरीके से किया जाए। निकाह या वलीमे में नाच गाना या आतिशबाजी न की जाए। निकाह समारोह सादगी के साथ कम खर्च में किया जाए। दूल्हे को चाहिए कि वह दुल्हन का महर तुरंत अदा करें।

उस दौरान वहां उपस्थित लोगों ने पूछने पर अपनी प्रतिक्रिया में कही कि इस दिशा में मुस्लिम समाज पहले नहीं सोच सकता था। इस बदलाव की दिशा का कारण गैर मुस्लिम समाज और वर्तमान सरकार के द्वारा उत्पन्न दबाव है और यह इस धार्मिक समुदाय की उन्नति के लिए जरूरी भी है। इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

(फोटो साभार गूगल और अमर उजाला से)

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