Latest ताज़ा खबर Other

कृषि कानून 2020 पर संवाद की चर्चा

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, 18 जनवरी 2021। संवाद द्वारा आयोजित सामूहिक चर्चा ‘कृषि कानून-2020‘ विषय पर कल 17 जनवरी को प्रयागराज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जे0 के0 पार्क में बतौर स्टडी सर्किल की गई। इस संवाद में सोम, शशांक, शहरयार, विकास, रोहित, प्रिंस, प्रदीप्त, कवि, उमाकांत,शात्री, सुनील मौर्य, सोनू, अनिरुद्ध, शिवानी, प्राची, सौम्या, बिपिन, उत्कर्ष, यश आदि तथा बतौर वक्ता, कवि, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता, मुख्यतः सुशील मानव ने भाजपा सरकार द्वारा लाये गए तीनों कृषि कानून के विरोध में और दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आन्दोलन के समर्थन में बातें रखी।

मुख्य वक्ता सुशील मानव ने चर्चा में कहा कि ” केंद्र सरकार जोकि पूंजीवाद के प्रबल समर्थक है और जिसने देश के सारे सार्वजिनक सेवाओं संसाधनों और संपत्तियों को कार्पोरेट के हाथों में सौंपने का मन बना रखा है। उसने कृषि क्षेत्र को भी कार्पोरेट के सुपुर्द करने के लिए तीन कृषि क़ानून लेकर आये। ये कृषि क़ानून अध्यादेश की शक्ल में कोविड-19 पीक टाइम में लाये गया ताकि समुचित विरोध न हो सके।

कृषि के कार्पोरेटाईजेशन और व्यावसायीकरण के परिणाम से बड़े कर्ज़ में फँसकर आत्महत्या करने जैसे कदम उठाएंगे। सुशील मानव तीनों कृषि कानूनों के बारे विस्तार में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह कानून कृषि के क्षेत्र में निजीकरण लाकर किसानों के ऊपर पहले से गहराते संकट को ही कानूनी तौर पर भी प्रमाणिकता प्रदान करता है। आवश्यक उत्पाद अधिनियम कानून ज़रूरी खाद्य उत्पादों को भी बाज़ार के हाथों छोड़ देगा जो कि किसी भी आपदा के समय ज़रूरी समान जो सरकार वितरित करती है अब नहीं कर पाएगी।

इन कानूनों में जो कानून कृषि में व्यापार क्षेत्र को खोलने की बात करता है, वह कानून कॉरपोरेटों के पक्ष में तो है और उससे किसान अपने ही खेतों पर मज़दूर बन कर रह जाएंगे। “ये क़ानून किसानों को विवाद की स्थिति में सिविल कोर्ट जाने से रोकता है। कांट्रैक्ट फार्मिंग के इस कानून की वजह से देश में भूमिहीन किसानों के एक बहुत बड़े वर्ग के जीवन पर गहरा संकट आने वाला है

देश में कुल 26.3 करोड़ परिवार कृषि कार्य करते हैं। लेकिन इसमें से सिर्फ़ 11.9 करोड़ किसानों के पास खुद की ज़मीन है। जबकि 14.43 करोड़ किसान भूमिहीन हैं। भूमिहीन किसानों की एक बड़ी संख्या ‘बंटाई’ पर खेती करती है। इस नए कानून के जरिए पूंजीपतियों के हितों को संरक्षित करके कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए खुला छूट दिया जा रहा है। कार्पोरेट कंपनियां मशीनों के जरिए खेती का कार्य करेंगी न कि मजदूरों के जरिए। इस तरह यह कानून देश के 14 करोड़ भूमिहीन किसानों के भविष्य को प्रभावित करने जा रहा है।

उन्होंने कहा-” बंदरगाह विशेषकर गुजरात के पहले ही अडानी को सौंपे जा चुके हैं। ये पूरे देश को ही क़ानूनी प्रक्रिया से बाहर कर देंगे जहां सिर्फ कार्पोरेट का राज चलेगा। इस आन्दोलन से “कृषि कानूनों की लीगलिटी और किसान आंदोलन पर 6 याचिकाएं थीं सुप्रीम कोर्ट में। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से पहले वो याचिकाएं नहीं सुनीं।

कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी व एमएसपी पर खरीद की गारंटी के क़ानून की मांग लेकर 26 नवंबर 2020 से जारी किसान आंदोलन पर बोलते हुए सुशील मानव ने कहा कि – “ये नये दौर का नया किसान आंदोलन है। जो सीधे सीधे सरकार की प्रो-कारर्पोरेट पोलिसी के खिलाफ़ टकरा रहा है। इसलिए अपनी अंतर्वस्तु में ये किसान आंदोलन न सिर्फ़ राजनीतिक है। बल्कि ये किसान आंदोलन हमारे राजनीतिक अर्थशास्त्र को भी बदल कर रख देगा, इसमें वो कूव्वत है।

संवाद चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि दरअसल किसानों ने इस देश की सरकार और व्यवस्था की कमजोर नस पकड़ ली है। दशहरा पर नरेंद्र मोदी के साथ अडानी-अंबानी का पुतला फूँकने से शुरु हुआ कार्पोरेट का विरोध रिलायंस के पेट्रोल पंप और रिलायंस स्टोर के घेराव से होते हुए जीयो सिम पोर्ट कराने और अब जीयो के टॉवर तोड़ने तक पहुंच चुका है। ये किसान आंदोलन हमें सिखाता है कि आंदोलन में कितने धैर्य और दीर्घकालीन समय देने की ज़रूरत होती है।”

(नित्यानंद गायेन की रिपोर्टिंग)

 

Related posts

चार लेन वाले राजमार्ग 24 घंटे में, सबसे लंबी सड़क निर्माण का विश्व रिकॉर्ड

My Mirror

शिवहर जिला अधिकारी ने विधानसभा चुनाव को लेकर की बैठक

My Mirror

Yagna, cow urine can kill coronavirus: Uttarakhand BJP legislator

cradmin

Leave a Comment