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खेती किसानी और राज : राजकमल गोस्वामी

“भारत पर राज करने वाला

खेती किसानी की उपेक्षा कर ही नहीं सकता”।

– राजकमल गोस्वामी

 

भारत पर राज करने वाला खेती किसानी की उपेक्षा कर ही नहीं सकता।पुराने ज़माने में तो खेती की उपज ही राजस्व का सबसे बड़ा श्रोत था। पानी नहीं बरसा तो खेती फेल। किसान की चमड़ी उधेड़ लो तो भी वह लगान नहीं दे पायेगा। बादशाहों के ऐशो आराम में खलल के साथ साथ लाखों लोग अकाल में भूख से तड़प तड़प कर मर जाते थे। मुस्लिम राज में तो अक्सर अकाल पड़ता रहता था। गंगा जमुना के दोआब तक में भीषण अकाल पड़ता था। फ़िरोज़ तुगलक ने सतलज और यमुना से कुछ नहरें बनवाई थीं।
अंग्रेज़ जब आये तो उन्होंने किसान से वसूली के लिये ज़मींदारी सिस्टम विकसित किया हालाँकि कहीं कहीं महालवारी और रैयतवारी सिस्टम भी रहा लेकिन उपज में एक बड़ा हिस्सा लगान के रूप में वसूला जाता था। ये तहसीलदार डिप्टी साहब कलेक्टर कमिश्नर और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू का मोटा अमला सिर्फ और सिर्फ लगान वसूलने के लिये ही खड़ा किया गया था जो आज भी बरकरार है।

अंग्रेज़ों ने अपनी और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये भारत में नहरों का जाल बिछा दिया। आज अपर गंगा कैनाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि की जीवन रेखा है। दक्षिण में गोदावरी पर बाँध बनाने वाले अंग्रेज़ इंजीनियर सर ऑर्थर कॉटन की मूर्तियों पर आज भी कृतज्ञ जनता द्वारा माला चढ़ाई जाती है। कृष्णराज सागर बाँध बनवाने वाले इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेशरैया ने कर्नाटक में नहरों का जाल बिछा दिया। बाद में उन्हें भारत रत्न भी प्रदान किया गया।

भारत स्वतंत्र होने के बाद तो किसान हमारी पहली प्राथमिकता रहा। ज़मीदारी उन्मूलन, बड़े बाँधों का निर्माण, नई नहरें और पूरे देश को विकास खंडों में बाँट कर गाँव गाँव में आधुनिक खेती की तकनीक, उर्वरक और बीज पहुँचाये गये। कृषि विश्वविद्यालय खोले गये जहाँ संकर बीजों की श्रंखला तैयार की गई। बौने गेहूँ और पशुओं की संकर नस्लों ने हरित क्रांति और ऑपरेशन फ्लड चला कर खाद्य उत्पादन और दुग्ध उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर कर दिया।

जिस लगान को वसूलने के लिये कभी ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुगल बादशाह से बंगाल बिहार और उड़ीसा के दीवानी अधिकार लिये थे वह लगान देश में कब का माफ कर दिया गया। अब कहीं ज़बरन नील या अफीम की खेती नहीं होती। किसान आज अपनी ज़मीन का मालिक है। फिर भी उसकी माँगें हैं कि पूरी नहीं होतीं।

जैसा फाइव स्टार आंदोलन चल रहा है वह भारतीय किसान की सम्पन्नता का परिचय स्वयं देता है। किसान वहीं दुखी है जहाँ सिंचाई का साधन नहीं है।
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