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जनजातीय सलाहकार परिषद में आदिम जनजातीय समूहों को मिले उचित भागीदारी : लक्ष्मी नारायण मुण्डा

झारखंड के जनजातीय सलाहकार परिषद में आदिम जनजातीय समूहों को मिले उचित भागीदारी

रांची, झारखण्ड, 12 जनवरी 2021। झारखंड में झारखंडी आदिवासी नेतृत्व और मुख्यमंत्री के होने के बावजूद राज्य में आदिवासी जनता और उनकी जमीन की लूट कम नहीं हो रही है। यह तथ्य भी अब स्पष्ट हो रहा है कि इस लूट में आदिवासी नेता, अफसर और माफिया भी गाढ़े तौर पर सक्रिय हैं।

इस लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ आदिवासी और झारखंडी जनता को संघर्ष के लिए संगठित करने में आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा जोर शोर से सक्रिय है। इस बार जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribal advisory council) TAC का मामला आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा ने उठाया है।

राज्य के राजपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा ने टीएसी मामले में एक ज्ञापन दिया है। टीएसी मुद्दे पर आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा के मुख्य संयोजक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा है कि अबकी बार झारखंड में जनजातीय सलाहकार परिषद का सदस्य छोटी-छोटी जनजातीय समुदाय या आदिम जनजाति समुदाय के सदस्यों को बनाना चाहिए। श्री मुंडा ने कहा कि हमेशा से ही टीएसी के सदस्य बड़े जनजाति समूह जैसे संथाल, उरांव, मुंडा हो से ही बनाए जाते रहे हैं। जबकि छोटी-छोटी जनजातीय समूह जैसे लोहरा, बेदिया, चेरो, खरवार आदि और आदिम जनजाति समूह से कभी भी टीएसी के सदस्य नहीं बनाया जाता है।

आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा के मुख्य संयोजक लक्ष्मी नारायण मुण्डा ने कहा कि झारखंड में 32 जनजातीयां हैं, जिनमें 8 आदिम जनजाति है- असूर, बिरहोर, कोरबा,परहीया, बिरजिया, सोरपहाड़िया, मालपहाड़िया और सबर। यह कहना उचित होगा कि संथाल उरांव मुंडा हो जनजाति समुदाय के लोगों को संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व मिल जाता है जबकि छोटी-छोटी जनजातीय समूह या आदिम जनजाति समूह को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है। इसलिए इन लोगों के प्रतिनिधित्व की गारंटी के लिए इन्हीं समुदाय के लोगों को टीएसी सदस्य बनाना चाहिए इस आशय का एक ज्ञापन राज्यपाल महोदय और मुख्यमंत्री झारखंड को दिया गया है|
(आदिवासी जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा के प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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