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स्टेन स्वामी के समर्थन में एनजीओ बुद्धिजीवियों का अनशन

रांची, झारखंड, 12 अक्टूबर 2020। झारखंड की राजधानी रांची में “स्टेन स्वामी को रिहा करो” का नारा लगाते हुए एनजीओ बुद्धिजीवियों ने शहर के बिरसा समाधि स्थल पर अनशन शुरू किया।

झारखंडी क्रांतिकारियों, एनजीओ, माओवादियों, कम्यूनिस्टों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों के कथित ‘नेता-संरक्षक’ और फादर स्टेन स्वामी को एनआईए आरोपों की जांच और पूछताछ के लिए 8 अक्टूबर 2020 को ‘बगईचा’ से ले गयी है।

सूत्रों के मुताबिक चर्च ‘बगईचा’ (नामकोम, रांची) भी उन केन्द्रों में से एक है जहाँ से सरकार के खिलाफ विद्रोह संगठित करने और माओवादियों को प्रश्रय देने तथा पोषित किया जाता रहा है। बगईचा केन्द्र से भाजपा सरकार को ‘हिन्दूवादी’ घोषित करते हुए और कथित ‘आरएसएस के विरोध’ के नाम पर आदिवासियों के बीच चर्च व चर्च के पोषित संगठनों और एनजीओ के द्वारा ‘पत्थलगड़ी’ अभियान चलाया गया था।

चर्च के फादर स्टेन स्वामी पर एनआईए द्वारा आरोप है कि वह झारखंड में माओवादियों सहित कई एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संगठनों को पोषित करता रहा है और कथित आदिवासी समर्थन के नाम पर सरकार के योजनाओं और सनातन धर्म और परम्पराओं का विरोध करता रहा है। इन विरोधों को आधार बनाकर वह ‘आदिवासी हिन्दू नहीं है’ के विचारों का प्रसार करता है और आदिवासी समुदाय को ईसाई और सरकार विरोधी बनाता है।

स्टेन स्वामी पर एनआईए द्वारा लगाए आरोपों को झारखंड के विभिन्न संगठन, एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी इनकार करते हैं।

स्टेन स्वामी को रिहा करने की मांग को लेकर रांची में बिरसा समाधि पर ‘सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक संगठनों’ द्वारा अनशन किया गया। अनशनकारियों ने स्टेन की रिहाई के साथ ‘राज्य की स्वत्तायता’ को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को पत्र लिखने और स्टेन स्वामी को रिहा कराने के लिए त्वरित कार्रवाई करने, भीमा कोरेगांव के केस में फर्जी तरीके से फंसाये गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों पर से मुकदमा वापस लेने, यूएपीए रद्द करने, एनआईए एवं सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग करना बंद करने और एनआईए के बारे में झारखंड सरकार द्वारा सुस्पष्ट स्टैंड लेने जैसा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ व केरल ने लिया है, जैसे मांगों को भी रखा।

इन अनशनकारियों में आलोका कुजूर, भुनेश्वर केवट, कुमार विनोद, नदीम खान, सिराज दत्ता, इबरार अहमद, फ़ादर महेंद्र पीटर तिग्गा, रतन तिर्की, प्रभाकर तिर्की, दामोदर तुरी, अजीता, प्रभा लकड़ा, आईटी तिर्की, खुसनी सेन, नंदिता भट्टाचार्या, स्वाति नारायण, सुशांतो, प्रवीर पीटर, पीटर मार्टिन, उमेश नजीर, श्याम, सूरज श्रीवास्तव, रिसित, अंटोनी पीएम, बुद्धन सिंह सिंकू आदि और सीपीआई एमएल, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी, ओमेन महिला संगठन, इप्टा, आईसा, एपीआईडब्लूए, एआईसीसीटीयू, एआईपीएफ़, सांझा मंच, झाररवंड छात्र संघ, कांग्रेस, एआईयीएफ, एआईटीयूसी, राईट फॉर फूड कैंपेन, झाररवंड जनाधिकार महासभा, झलक, संगम, सामाजिक सांस्कृतिक संस्था, इंड़ीजेनस विमेन इंडिया नेटवर्क, एनएपीएम आदि शामिल रहे।

स्टेन स्वामी को महान बनाते हुए धरना पर बैठे हुए एनजीओ बुद्धिजीवियों ने कहा कि “स्टेन स्वामी बिरसा मुण्डा के विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जल जंगल जमीन पर हमला बढ़ता जा रहा है। ‘राज्य की स्वत्तायता के विरूद्ध’ केंद्र सरकार काम कर रही है”। और ‘सभी’ सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठनों से स्टैन के पक्ष में आने की अपील करते हैं “।

(अलोका कुजूर, भुनेश्वर केवट एवं रतन तिर्की द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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