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राष्ट्रपति ने लगाया मुहर, पीएम ने कहा खेती बिल किसानों को ताकत देगा

नई दिल्ली, 28 सितम्बर 2020. संसद में निर्विरोध पास हुए तीनों बिल पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिये. संसद के दोनों सदन में कृषि सुधार बिल पेश किये जाने के बाद कांग्रेस ने एनडीए के इस बिल के विरोध का मोर्चा संभाल लिया और कांग्रेस के नेतृत्व में मुख्यतः पंजाब के किसान सडकों और रेल लाइनों पर आ गए.

कांग्रेस द्वारा एनडीए द्वारा प्रस्तुत बिल के खिलाफ मोर्चा शुरू करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सरकार की ओर से कांग्रेस के खिलाफ आगे आ कर विरोध की कमान अपने हाथ में ले ली थी और देश के किसानों को इस बिल के फायदे गिनाने लगे थे.

लेकिन कांग्रेस अपने हाथ लगी इस अवसर को खोना नहीं चाहती है. इसलिए वह इसके विरोध में अपने कदम आगे बढ़ा रही है. कांग्रेस के पीछे भाजपा विरोधी पार्टियाँ और भारत की कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी खडी है. लेकिन इस विरोध की सीमा भी अब दिखाई देने लगी है. इन बिलों का विरोध देशव्यापी न होकर सिर्फ कांग्रेस शाषित राज्यों में हो रहा है और अब यह सिर्फ प्रतीक का रूप लेने लगा है.

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करते ही ये तीनों बिल कानून बन गए हैं. केंद्र सरकार जल्द ही इससे सम्बंधित अधिसूचना प्रकाशित करेगी. महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वे अपने राज्य में इस खेती बिल को लागू नहीं करेगी. इस बिल के विरोध में एनडीए सरकार का ही साथी अकाली दल ने सबसे पहले अपना इस्तीफा दे सरकार से अलग हुआ था, के नेता सुखबीर बादल ने कहा कि यह देश के किसानों के लिए काला दिन है.

इस कृषि बिल के समर्थन में रविवार के पीएम के कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने कहा था कि संसद से खेती सुधार बिलों के पारित होने के बाद किसानों को अब उनकी इच्छा के अनुसार, जहाँ ज्यादा दाम मिले वहां अपनी फसल बेचने की आज़ादी मिल गयी है.

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