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महामारी को सरकार ने बनाया लूट का अवसर

अभिषेक रंजन सिंह-
(24 सितम्बर 2020)

देश में वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से रेल परिचालन कई महीनों तक बंद रहा। हाल के दिनों में सीमित संख्या में रेल सेवाएं शुरू हुईं। लेकिन इसमें भी काफी विसंगतियां हैं।

स्पेशल ट्रेन के नाम पर अधिकांश रूटों पर वातानुकूलित ट्रेनें चल रही हैं, जबकि कोरोना की वजह से आम लोगों की माली हालत ऐसी नहीं है कि वे महंगी यात्रा कर सकें। एक मिसाल देना चाहूंगा।

width="225"“नई दिल्ली भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस की खाली बोगी”

नई दिल्ली से अगर किसी यात्री को कोलकाता जाना हो तो उसके समक्ष महज़ दो ट्रेनें हैं। एक नई दिल्ली-हावड़ा और दूसरा पूर्वा एक्सप्रेस। पहली ट्रेन सप्ताह में सातों दिन चलती है और वह पूरी तरह वातानुकूलित है। ज़ाहिर है किराया ढाई हजार से अधिक है।

दूसरी ट्रेन पूर्वा है, जिसमें स्लीपर और सामान्य कोच भी हैं, लेकिन यह हफ्ते में सिर्फ तीन दिनों तक चलती है। जबकि इस रूट में यात्रियों की संख्या अधिक है।

नई दिल्ली भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस की खाली बोगी

आज मैं नई दिल्ली से बोकारो स्टील सिटी जाने के लिए भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस में तत्काल कोटे से टिकट लिया, जो इन दिनों स्पेशल ट्रेन के नाम से चल रही है। टिकट कराते समय मुझे लगा कि मुमकिन है काफी भीड़ होगी, इसलिए सामान्य कोटे में सीट उपलब्ध नहीं है।

लेकिन ट्रेन में पहुंचने पर मैंने स्वयं को ठगा हुआ महसूस किया, क्योंकि जिस कोच बी-8 में मैं यात्रा कर रहा हूँ, उसमें बमुश्किल 10 से 12 यात्री हैं। यही हाल बाकी अन्य कोचों में भी है। जबकि मैंने तत्काल में टिकट लिया जो करीब 2600 रुपए का मिला।

मेरा सवाल रेलमंत्री और केंद्र सरकार से है कि आपदा की इस घड़ी में जब आम आदमी परेशान है,उनकी माली हालत सही नहीं है। बावजूद इसके तत्काल और डायनेमिक फेयर व तत्काल कोटे के नाम पर उन्हें क्यों लुटा जा रहा है। जबकि,लगभग समूची ट्रेन खाली जा रही है।

भारी बहुमत से सत्ता हासिल करने का यह अर्थ कत्तई नहीं होता कि जनता का शोषण किया जाए? याद रखें दुनिया की कोई हुकूमत अमृत पीकर नहीं आई है। देर-सबेर ऐसी उन सत्ताधारियों का अंत होना है, जो किसी न किसी रूप से आम अवाम का शोषण करतीं हैं।
#AbhishekRanjanSingh

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