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कानपूर और गोरखपुर में हथियार उत्पादन, भारतीय कम्पनी के साथ करार

नई दिल्ली, 24 सितम्बर 2020. इंग्लैंड की सेना की 1915 प्रथम विश्वयुद्ध में प्रमुख हथियारों में एक ब्रांड वेब्ले एंड स्कॉट भी था. वेब्ले के बने हथियारों का खूब इस्तेमाल हुआ और यह अच्छा परफॉर्म भी कर रही थी. यह दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित ब्रांड है. वेब्ले एंड स्कॉट के बने हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति सिर्फ ब्रिटेन की शाही सेना, सुरक्षा और कॉमनवेल्थ सदस्यों को थी.

अब इस कम्पनी ने भारतीय कम्पनी के साथ करार किया है. यह करार वेब्ले एंड स्कॉट ने भारतीय कम्पनी सियाल ग्रुप के साथ किया है. यह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला के संडीला औद्दोगिक इलाके में है. यह कारखाना लखनऊ से 110 किमी दूर है. वेब्ले एंड स्कॉट के अनुसार भारत में वह गोरखपुर और कानपूर में फायरआर्म्स के उत्पादन के साथ शूटिंग रेंज भी स्थापित करेगी, जहाँ हथियारों के बारे में और उन्हें चलाने के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जायेगा.

वेब्ले एंड स्कॉट पुलिस, सेना, सिविलियन और खेलों के लिए हथियार बनाएगी. सूत्रों के मुताबिक सालाना 3,000 रिवॉल्वर के तत्काल उत्पादन लक्ष्य के साथ .32 कैलिबर और 13शॉट्स के मार्क IV क्लासिक की रिवॉल्वर लॉन्च करेगी जो पॉलीमर फ्रेम और स्टील स्लाइड की होगी.

कम्पनी की भविष्य की योजना में 12बोर की पंप शॉटगन, .45 कैलिबर पिस्टल और एयर राइफल्स भारत में हीं बनाने और बेचने की है, जोकि जून 2021 से 2021 के नवम्बर तक आ जाएगी. जिसमे .32 कैलिबर की रिवॉल्वर का लागत लगभग 1 लाख रूपये हो सकती है.

वेब्ले एंड स्कॉट ने अपने ब्रांड के रिवॉल्वर स्कॉट भारत में बनाने के फैसले के साथ करार कर निर्माण भी शुरू कर दिया है. वेब्ले एंड स्कॉट का भारतीय कंपनियों के साथ आने से भारत में भी अब उन्नत हथियारों का निर्माण में मदद मिलेगी और हथियार बाज़ार को उन्नत और शानदार विकल्प मिलेगा.

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