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मराठी बब्बर बाघों ने कंगना पर किया हमला

नई दिल्ली, 10 सितम्बर 2020।

बीएमसी की कार्रवाई पर कंगना रनौत ने मुंबई पहुंचकर कहा कि-
उद्धव ठाकरे ! आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा|

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने से शुरू हुई यह मुहीम अब कंगना रानौत बनाम सिव सेना के जंग में सेट हो गयी है| कहने वालों के अनुसार यह जंग अब सही दिशा में सही दुश्मन के खिलाफ पटरी पर सेट हुई है| और महाराष्ट्र के बब्बर बाघों ने कंगना पर हमला करके यह साबित भी कर दिया है| यह वही शिव सेना है जो बाला साहेब ठाकरे के समय मुम्बई व् महाराष्ट्र में मजदूर आंदोलनों को निशाना बनाती थी और फैक्ट्री मालिकों के इशारों पर मजदूर नेताओं की हत्याएं हो रही थी, मजदूर युनियनों को ख़त्म किया जा रहा था और उसकी जगह मराठी मानुस का राष्ट्रवाद खड़ा किया गया| आज भी महाराष्ट्र के राष्ट्रवाद की शिकार मुम्बई में काम करने वाले मेहनतकश लोग ही होता है|

कंगना ने अपने ट्वीटर और वीडियो में संजय राऊत को छोड़कर अब सीधे उद्धव ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा कि-
“उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है तूने फ़िल्म माफ़िया के साथ मिलकर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है| आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा| ये वक़्त का पहिया है, याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता| और, मुझे लगता है तुमने मुझ पर बहुत बड़ा अहसान किया है| मुझे पता था कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी, आज मैंने महसूस किया है| आज मैं इस देश को वचन देती हूं कि मैं अयोध्या पर ही नहीं कश्मीर पर भी एक फ़िल्म बनाऊंगी| और, अपने देशवासियों के जगाऊंगी| क्योंकि मुझे पता था कि ये हमारे साथ होगा… तो लेकिन ये मेरे साथ हुआ है| इसका कोई मतलब है, कोई मायने है| उद्धव ठाकरे अच्छा हुआ कि ये क्रूरता मेरे साथ हुई क्योंकि इसके कुछ मायने हैं,…जय हिंद, जय महाराष्ट्र|”

इस घटना पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि- “ये जो कुछ हुआ है, वो महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार हुआ है”। वहीं एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि “यह कारवाई जरूरी नहीं थी, इसे अनावश्यक रूप से तूल दिया गया”।

लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि आख़िर कंगना ने जिस अंदाज़ में उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है, उसके पीछे क्या वजह हो सकती है?

महाराष्ट्र की वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन कहती हैं, “मैं 110 फ़ीसदी मानती हूँ कि कंगना को बीजेपी का भारी समर्थन हासिल है| अगर ऐसा नहीं होता तो ये संभव ही न होता कि वह उद्धव ठाकरे के बारे में इस तरह से बात कर पातीं| मैं ये भी मानती हूँ कि कंगना ये सब करते हुए खुद में आश्वस्त होंगी कि उन्हें राज्य सभा का टिकट मिल जाए| क्योंकि अब उन्होंने जो किया है, उसके बाद भले ही शिव सेना सीधे उन पर हमला न करे, लेकिन वह बॉलीवुड और सरकारी अमले के माध्यम से उन्हें घेरने की कोशिश करेगी| इतिहास गवाह है कि शिव सेना के बॉलीवुड से बहुत ही गहरे संबंध रहे हैं और ये उनका तरीका है कि किसी को ख़त्म करना है तो उसे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करके ख़त्म करो|”

लेकिन कंगना रनोट किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से संबंध होने या राजनीति में जाने की योजनाओं का खंडन कर चुकी हैं| अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि “कंगना रनौत न तो एक मोहरा हैं और न ही एक खिलाड़ी| और, वो व्यक्ति आज तक पैदा नहीं हुआ है जो कि उन्हें मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर सके|”

कंगना के घर को तोड़े जाने की एनसीपी के अलावा बीजेपी और कांग्रेस नेताओं की ओर से भी आलोचना होने लगी है। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट करके लिखा है, “कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमॉलिश करने का तरीका? क्योंकि हाई कोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा द, पूरा एक्शन प्रतिशोध से ओत-प्रोत था| लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है| कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरू हो जाए!”

कंगना ने ट्वीट करके बताया था कि “मेरे घर में किसी तरह का अवैध निर्माण नहीं हुआ है| इसके साथ ही सरकार ने कोविड के दौरान 30 सितंबर तक किसी भी तरह की ध्वस्त करने वाली कार्रवाइयों पर रोक लगा रखी थी| ‘बुलीवुड’ अब देखिए कि फ़ासीवाद कुछ ऐसा दिखता है|”

रेसलर बबिता फोगाट ने कंगना के समर्थन में अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “गीदड़ की जब मौत आती है तो फिर वह शहर की तरफ़ भागता है यही हाल शिवसेना का है कंगना राणावत बहन डरने वाली नहीं है| जब पूरा देश उनके साथ है तो ऑफिस फिर बन जाएगा, लेकिन शिवसेना की औकात का पता चल गया| बहन डरना नहीं है पूरा देश आपके साथ खड़ा है|”

इससे पहले शाहरूख ख़ान से लेकर कपिल शर्मा जैसी हस्तियों के ख़िलाफ़ भी बीएमसी ने कार्रवाई की है| लेकिन 24 घंटे जैसा फरमान पर बीएमसी द्वारा कंगना का घर ढाहना यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है| वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हेमंत देसाई कहते हैं, “ये तो पूरी तरह सही है कि कंगना रनोट के ख़िलाफ़ बीएमसी ने जो कार्रवाई की है, उसमें बदले की भावना नज़र आती है| क्योंकि मुंबई में तमाम ऐसी इमारते हैं जहां अवैध निर्माण किया गया है| वहां इस तरह की कार्रवाई नहीं होती है|”

वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन कहती हैं कि “ये मामला आसान नहीं है, बीएमसी ऐसा कुछ कर रही है उस पर एनसीपी नेता शरद पवार की छाप दिख रही है !”

सुजाता आनंदन मानती हैं कि “ये पहला मामला नहीं है कि बीएमसी ऐसा कुछ कर रही हो| इससे पहले जब आरजे मलिष्का ने मुंबई के गढ्ढों वाली सड़क को लेकर एक गाना बनाया था तब भी बीएमसी ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी| मैं जितना शिव सेना को समझती हूं, उसके मुताबिक़ बीएमसी ने जो कुछ किया है, वो शिव सेना की स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं है| शिव सेना की स्वाभाविक प्रतिक्रिया ये होती कि वह कुछ अराजक तत्वों को भेजकर कंगना के दफ़्तर पर तोड़फोड़ करवा देती| लेकिन बीएमसी ने जिस ढंग से कंगना के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, वो बताता है कि शरद पवार की इसमें बड़ी भूमिका है| क्योंकि पवार को अपने दुश्मनों से क़ानूनी परिधि में रहते हुए निपटने के लिए जाना जाता है| अब तक शिव सेना की ओर से किसी तरह की अराजकता नहीं फ़ैलाई गई है तो वो इसलिए है क्योंकि शरद पवार ने इसकी इजाज़त नहीं दी है| और उद्धव ठाकरे भले ही इस सरकार के मुख्यमंत्री हों लेकिन इसके असली नेता शरद पवार ही हैं| संजय राउत एक मौके पर ये कह भी चुके हैं कि इस सरकार के हेडमास्टर पवार ही हैं| ऐसे में ये जो कुछ हो रहा है, उस पर पवार की छाप नज़र आती है|”

सुजाता आनंदन मानती हैं कि अगर कंगना ने महाराष्ट्र सरकार के ख़िलाफ़ अपने व्यवहार में नरमी नहीं दिखाई तो ये सब ऐसे हीं चलता रहेगा| और, इस बात में दो राय नहीं है कि यह लडाई ऐसे ही चलती रहेगी, बीजेपी अगले पाँच सालों तक ठाकरे परिवार को अपने निशाने पर रखेगी| लेकिन अगर सवाल होगा कि यह हाई डेसिबल बयानबाजी कब तक जारी रहेगा तो इसका जवाब दो शब्दों में है – बिहार चुनाव|”

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