अपराध

सरेंडर पर एनकाउंटर !

 

कानपुर का गैंगस्टर विकास दुबे  कल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से सरेंडर कर गिरफ्तार हुआ था| आज सुबह यूपी एसटीएफ उसे यूपी ला रही थी ! रास्ते में कार पलट गयी और विकास दुबे को भागने के शक में एनकाउंटर कर ढेर कर दिया गया। किन्तु ये कहानी आम जनमानस को जम नहीं रही है। आखिर कल ही जो आदमी चीख चीख कर कह रहा था कि ” मैं कानपुर वाला विकास दुबे हूं “ सरेंडर किया हो वो भागने की कोशिश क्यूं करेगा?
विपक्ष ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है ! आपको बताते चले कि यूपी पुलिस पर पहले भी फर्जी एनकाउंटर करने के आरोप लगते रहे हैं ! विकास दुबे ने गिरफ्तारी से पहले अपने लिंक कई सफेद कॉलर वाले बड़े लोगों से बताए थे। तो क्या यह एनकाउन्टर उन्हीं लोगो को बचाने की कारिस्तानी तो नहीं है? कहीं यह एनकाउन्टर सत्ता का अपराध छुपाने की कोशिश तो नहीं ? क्योंकि विकास दुबे का सम्बन्ध उत्तर प्रदेश की सभी बड़ी राजनैतिक पार्टियों से रहा है चाहे वो सपा हो, बसपा हो या वर्तमान की भाजपा, सभी ने उसे एक वक्त पर समर्थन और सह दी थी।

कल से विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश के गृहमंत्री सवालों के घेरे में आ गये थे। खुद यूपी सरकार पर कई सवाल उठ रहे थे। तो क्या उन सवालों का जवाब यही है?
खैर सच जो भी हो! वो तो जांच के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल जो लोग विकास दुबे का एनकाउंटर चाहते थे उनके लिए अच्छी खबर यह है कि दुबे का एनकाउंटर हो गया है!

बस वैसे नहीं जैसे उन्होंने सोचा था !  तो क्या ये वैसे हुआ जैसा पर्दे के पीछे छिपे लोगों ने इसको सोचा था ?

सवाल बहुत हैं और जवाब बस उत्तर प्रदेश की हवाओ  में तैर रहे हैं !

10 -07-2020 शुक्रवार १२:००

Related posts

This woman creates eco-friendly cotton pads for unpriviledged women at home

cradmin

‘No Time to Die’ trailer shot may have given a glimpse of the upcoming Nokia 8.2 5G smartphone

cradmin

गाजियाबाद में देह व्यापार का भंडाफोड़

My Mirror

1 comment

अरुण प्रधान July 10, 2020 at 1:28 pm

खबरों के मुताबिक विकास दुबे लगभग 30 वर्ष अपने पेशे में रहा। अपराध के पेशे में कैसे आया? यह वर्तमान समाज का महत्वपूर्ण विषय आज भी है।
अपने तीस वर्षो के आपराधिक जीवन में वह लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा।
विकास दुबे अपने आकाओं के कहने पर आत्मसमर्पण किया होगा। और, यह साजिश है सबूत मिटाने की।
यह तो शीशे की तरह स्पष्ट है कि जिस सत्ता को जनता वोट देकर चुनती है वह अपने मूल चरित्र में कितनी हिंसक और अपराधी है।

Reply

Leave a Comment